How to Check मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं — पूरी गाइड in Madhya Pradesh — Complete Guide 2026
एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट मध्य प्रदेश वह कानूनी प्रमाण है जो बताता है कि किसी प्रॉपर्टी पर कोई रजिस्टर्ड मॉर्गेज, लियन या बकाया दावा नहीं है। इसके लिए आप MPIGR के तहत EC SAMPADA MP मॉड्यूल से आवेदन करते हैं। MP में खरीदारों को हमेशा EC को B1 एंट्री से क्रॉस-वेरिफाई करना चाहिए। यह गाइड दोनों जांच के तरीके बताती है।
मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट क्या है?
परिभाषा
एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट वह आधिकारिक दस्तावेज़ है जो इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस से जारी होता है और किसी निर्दिष्ट अवधि में किसी प्रॉपर्टी पर हुए हर रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन को सूचीबद्ध करता है। मध्य प्रदेश में MPIGR इसे SAMPADA पोर्टल के ज़रिए डिजिटल रूप से देता है।
EC ही वह इकलौता दस्तावेज़ है जो बताता है कि किसी प्रॉपर्टी पर कौन-कौन से वित्तीय दावे मौजूद हैं। साफ-सुथरा सेल डीड और साफ खसरा काफी नहीं हैं। बैंक रजिस्टर्ड मॉर्गेज के ज़रिए लोन अटैच करते हैं। कोर्ट रिकवरी ऑर्डर के तहत प्रॉपर्टी अटैच करते हैं। कभी-कभी बेचने वाले एक ही प्लॉट कई लेंडर्स के पास गिरवी रख देते हैं। इनमें से हर मामला सब-रजिस्ट्रार के पास चार्ज के रूप में दर्ज होता है। EC इन सभी चार्जों को एक कालानुक्रमिक सूची में इकट्ठा करता है। इसे नज़रअंदाज़ करने पर आप किसी और का लोन या कोर्ट अटैचमेंट अपने सिर ले सकते हैं।
MP में दो फॉर्मेट में EC जारी होता है। Form 15 EC मध्य प्रदेश उस मांगी गई अवधि के दौरान हुए सभी रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन जैसे सेल, मॉर्गेज, गिफ्ट, लीज़ और बंटवारा सूचीबद्ध करता है। Form 16 Nil EC, जिसे अक्सर Nil EC कहा जाता है, प्रमाणित करता है कि उस अवधि में कोई रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन नहीं हुआ। नई मॉर्गेज एंट्री वाला Form 15 खतरे की घंटी है। साफ Form 16 हरी झंडी है। दोनों ही मामलों में, सिर्फ EC काफी नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज अनौपचारिक देनदारियों की पुष्टि के लिए इसे हमेशा B1 लेजर के साथ मिलाकर देखें।
मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं: स्टेप-बाय-स्टेप
आप MPIGR के तहत SAMPADA पोर्टल से डिजिटल तरीके से या सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस जाकर खुद आवेदन कर सकते हैं। शुरू करने से पहले खसरा नंबर, ज़िला, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, मालिक का नाम और सर्च पीरियड तैयार रखें।
ऑनलाइन तरीका (सुझाया गया)
ऑफलाइन तरीका (सब-रजिस्ट्रार ऑफिस)
मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट में क्या होता है?
ये वे समस्याएं हैं जो MP में खरीदारों को पैसा और महीनों दोनों की कीमत चुकाती हैं।
| Field | What it means | What to check |
|---|---|---|
| जारीकर्ता सब-रजिस्ट्रार | EC जारी करने वाला ऑफिस | प्रॉपर्टी के अधिकार क्षेत्र वाले SRO से मेल खाना चाहिए |
| प्रॉपर्टी विवरण | खसरा, क्षेत्रफल, सीमाएं | सेल डीड और भू-नक्शा एंट्री से मेल खाना चाहिए |
| सर्च पीरियड (से और तक) | कवर की गई तारीख की अवधि | शहरी के लिए कम से कम 13 साल, कृषि के लिए 30 साल होनी चाहिए |
| ट्रांजैक्शन की तारीख | हर रजिस्टर्ड एंट्री कब दर्ज हुई | हर तारीख किसी जाने-पहचाने सेल या मॉर्गेज से मेल खानी चाहिए |
| ट्रांजैक्शन की प्रकृति | सेल, मॉर्गेज, गिफ्ट, लीज़, बंटवारा, डिक्री | मॉर्गेज और डिक्री रेड फ्लैग हैं |
| पक्षकार | एक्जीक्यूटेंट और दावेदारों के नाम | इसमें सभी जाने-पहचाने विक्रेताओं और बैंकों के नाम शामिल होने चाहिए |
| दस्तावेज़ संख्या | SRO रजिस्ट्रेशन रेफरेंस | SAMPADA e-search पर वेरिफाई होना चाहिए |
| डिजिटल हस्ताक्षर / QR कोड | प्रामाणिकता की मुहर | IGRS वेरिफिकेशन पेज पर स्कैन और वैलिड होना चाहिए |
मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट से जुड़ी आम समस्याएं
ये वे समस्याएं हैं जो MP में खरीदारों को पैसा और महीनों दोनों की कीमत चुकाती हैं।
मध्य प्रदेश में ज़मीन खरीदारों के लिए एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट क्यों ज़रूरी है
यही वह इकलौता दस्तावेज़ है जो "देखने में साफ" लगने वाली सेल को कानूनी रूप से साफ बनाता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
MP में EC मिलने में कितना समय लगता है?
Form 15 और Form 16 EC में क्या अंतर है?
MP में ज़मीन खरीदने से पहले EC कितने साल का होना चाहिए?
क्या मध्य प्रदेश में होम लोन के लिए EC अनिवार्य है?
MP में EC की प्रामाणिकता कैसे जांचें?
मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट की वैधता अवधि क्या है?
मध्य प्रदेश में EC और B1 में क्या अंतर है?
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