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How to Check मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं — पूरी गाइड in Madhya Pradesh — Complete Guide 2026

एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट मध्य प्रदेश वह कानूनी प्रमाण है जो बताता है कि किसी प्रॉपर्टी पर कोई रजिस्टर्ड मॉर्गेज, लियन या बकाया दावा नहीं है। इसके लिए आप MPIGR के तहत EC SAMPADA MP मॉड्यूल से आवेदन करते हैं। MP में खरीदारों को हमेशा EC को B1 एंट्री से क्रॉस-वेरिफाई करना चाहिए। यह गाइड दोनों जांच के तरीके बताती है।

Quick Reference
अन्य नामEC, भार मुक्त प्रमाण पत्र, SAMPADA EC
जारीकर्तासब-रजिस्ट्रार, इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ रजिस्ट्रेशन एंड स्टाम्प्स (IGRS), मध्य प्रदेश
वैधतामांगी गई निर्दिष्ट अवधि के लिए (आमतौर पर 13 या 30 साल)
लागतMP रजिस्ट्रेशन एंड स्टाम्प्स रूल्स के तहत आवेदन शुल्क के साथ प्रति वर्ष सर्च फीस
समय सीमाSAMPADA पर ऑनलाइन तेज़ है; ऑफलाइन SRO में 7 से 14 दिन लगते हैं
ऑनलाइन पोर्टलsampada.mpigr.gov.in MP
noteसटीक फीस MPIGR से कन्फर्म करें
1

मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट क्या है?

परिभाषा

एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट वह आधिकारिक दस्तावेज़ है जो इंडियन रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1908 के तहत सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस से जारी होता है और किसी निर्दिष्ट अवधि में किसी प्रॉपर्टी पर हुए हर रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन को सूचीबद्ध करता है। मध्य प्रदेश में MPIGR इसे SAMPADA पोर्टल के ज़रिए डिजिटल रूप से देता है।

EC ही वह इकलौता दस्तावेज़ है जो बताता है कि किसी प्रॉपर्टी पर कौन-कौन से वित्तीय दावे मौजूद हैं। साफ-सुथरा सेल डीड और साफ खसरा काफी नहीं हैं। बैंक रजिस्टर्ड मॉर्गेज के ज़रिए लोन अटैच करते हैं। कोर्ट रिकवरी ऑर्डर के तहत प्रॉपर्टी अटैच करते हैं। कभी-कभी बेचने वाले एक ही प्लॉट कई लेंडर्स के पास गिरवी रख देते हैं। इनमें से हर मामला सब-रजिस्ट्रार के पास चार्ज के रूप में दर्ज होता है। EC इन सभी चार्जों को एक कालानुक्रमिक सूची में इकट्ठा करता है। इसे नज़रअंदाज़ करने पर आप किसी और का लोन या कोर्ट अटैचमेंट अपने सिर ले सकते हैं।

MP में दो फॉर्मेट में EC जारी होता है। Form 15 EC मध्य प्रदेश उस मांगी गई अवधि के दौरान हुए सभी रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन जैसे सेल, मॉर्गेज, गिफ्ट, लीज़ और बंटवारा सूचीबद्ध करता है। Form 16 Nil EC, जिसे अक्सर Nil EC कहा जाता है, प्रमाणित करता है कि उस अवधि में कोई रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन नहीं हुआ। नई मॉर्गेज एंट्री वाला Form 15 खतरे की घंटी है। साफ Form 16 हरी झंडी है। दोनों ही मामलों में, सिर्फ EC काफी नहीं है। राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज अनौपचारिक देनदारियों की पुष्टि के लिए इसे हमेशा B1 लेजर के साथ मिलाकर देखें।

State-specific note: EC में मिली जानकारी को MP Bhulekh पर मौजूद B1 लायबिलिटी एंट्री से क्रॉस-वेरिफाई करें। SAMPADA EC रजिस्टर्ड चार्ज पकड़ता है। B1 राजस्व बकाया, गुप्त मॉर्गेज और विवाद संबंधी टिप्पणियां पकड़ता है। दोनों का इस्तेमाल करें, कभी अकेले एक पर भरोसा न करें।
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मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट कैसे बनवाएं: स्टेप-बाय-स्टेप

आप MPIGR के तहत SAMPADA पोर्टल से डिजिटल तरीके से या सब-रजिस्ट्रार के ऑफिस जाकर खुद आवेदन कर सकते हैं। शुरू करने से पहले खसरा नंबर, ज़िला, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, मालिक का नाम और सर्च पीरियड तैयार रखें।

ऑनलाइन तरीका (सुझाया गया)

1
SAMPADA पोर्टल खोलें [sampada
mpigr.gov.in](http://sampada.mpigr.gov.in) पर जाएं। नए यूज़र पहले रजिस्टर करें, फिर लॉगिन करें। पुराने यूज़र सीधे लॉगिन स्क्रीन पर जाकर EC सर्विस सेक्शन में जाएं।
पूरी प्रक्रिया में एक ही आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर और ईमेल इस्तेमाल करें। OTP फेल होने की वजह ज़्यादातर बेमेल संपर्क जानकारी होती है।
2
Search EC सर्विस ढूंढें पब्लिक सर्विसेज़ में Search EC या Encumbrance Certificate देखें
[mpigr.gov.in](http://mpigr.gov.in) का EC सर्च मॉड्यूल SAMPADA डैशबोर्ड के अंदर है।
3
प्रॉपर्टी की जानकारी भरें ज़िला, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, प्रॉपर्टी टाइप और डॉक्यूमेंट पीरियड (साल से साल तक) डालें
ज़्यादातर खरीदार शहरी प्लॉट के लिए 13 साल और कृषि भूमि के लिए 30 साल की अवधि मांगते हैं।
4
फीस भरें और डाउनलोड करें आवेदन शुल्क के साथ प्रति वर्ष सर्च फीस ऑनलाइन भरें
सिस्टम सर्च करता है, ट्रांजैक्शन दिखाता है, और डाउनलोड के लिए डिजिटल हस्ताक्षरित EC PDF जारी करता है।
डाउनलोड किए गए EC पर मौजूद QR कोड स्कैन करें। यह SAMPADA वेरिफिकेशन पेज से जुड़ा होना चाहिए। QR मैच न होने का मतलब है कि दस्तावेज़ असली नहीं है।

ऑफलाइन तरीका (सब-रजिस्ट्रार ऑफिस)

1
सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाएं उस सब-रजिस्ट्रार ऑफिस जाएं जिसके अधिकार क्षेत्र में प्रॉपर्टी आती है
साथ में ID प्रूफ, खसरा नंबर, बेचने वाले का नाम और जो सर्च पीरियड चाहिए वह लेकर जाएं।
2
लिखित आवेदन जमा करें EC आवेदन फॉर्म भरें
सब-रजिस्ट्रार EC आवेदन फॉर्म काउंटर पर मिलता है या MPIGR पोर्टल से डाउनलोड किया जा सकता है। सहायक कॉपियों के साथ जमा करें।
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तय फीस भरें काउंटर पर आवेदन शुल्क के साथ प्रति वर्ष सर्च फीस भरें
रसीद संभालकर रखें। इसके बिना आवेदन का फॉलो-अप करना मुश्किल हो जाता है।
4
सर्टिफाइड EC लें ऑफलाइन प्रोसेसिंग में सात से चौदह दिन लगते हैं
SRO की मुहर और हस्ताक्षर वाली सर्टिफाइड कॉपी लें। दस्तावेज़ स्वीकार करने से पहले हर ट्रांजैक्शन लाइन जांच लें।
दो सर्टिफाइड कॉपी लें। बैंक एक मांगेंगे और दूसरी आपके अपने रिकॉर्ड के लिए रखनी चाहिए।
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मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट में क्या होता है?

ये वे समस्याएं हैं जो MP में खरीदारों को पैसा और महीनों दोनों की कीमत चुकाती हैं।

Field What it means What to check
जारीकर्ता सब-रजिस्ट्रारEC जारी करने वाला ऑफिसप्रॉपर्टी के अधिकार क्षेत्र वाले SRO से मेल खाना चाहिए
प्रॉपर्टी विवरणखसरा, क्षेत्रफल, सीमाएंसेल डीड और भू-नक्शा एंट्री से मेल खाना चाहिए
सर्च पीरियड (से और तक)कवर की गई तारीख की अवधिशहरी के लिए कम से कम 13 साल, कृषि के लिए 30 साल होनी चाहिए
ट्रांजैक्शन की तारीखहर रजिस्टर्ड एंट्री कब दर्ज हुईहर तारीख किसी जाने-पहचाने सेल या मॉर्गेज से मेल खानी चाहिए
ट्रांजैक्शन की प्रकृतिसेल, मॉर्गेज, गिफ्ट, लीज़, बंटवारा, डिक्रीमॉर्गेज और डिक्री रेड फ्लैग हैं
पक्षकारएक्जीक्यूटेंट और दावेदारों के नामइसमें सभी जाने-पहचाने विक्रेताओं और बैंकों के नाम शामिल होने चाहिए
दस्तावेज़ संख्याSRO रजिस्ट्रेशन रेफरेंसSAMPADA e-search पर वेरिफाई होना चाहिए
डिजिटल हस्ताक्षर / QR कोडप्रामाणिकता की मुहरIGRS वेरिफिकेशन पेज पर स्कैन और वैलिड होना चाहिए
Good sign: साफ-सुथरे EC में मांगी गई पूरी अवधि दिखती है, कोई पेंडिंग मॉर्गेज एंट्री नहीं होती, हर ट्रांजैक्शन किसी जाने-पहचाने डीड से मेल खाता है, और डिजिटल हस्ताक्षर के साथ QR कोड SAMPADA पोर्टल पर सत्यापित होता है।
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मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट से जुड़ी आम समस्याएं

ये वे समस्याएं हैं जो MP में खरीदारों को पैसा और महीनों दोनों की कीमत चुकाती हैं।

Form 15 पर पेंडिंग मॉर्गेज एंट्री
EC में एक रजिस्टर्ड मॉर्गेज दिखता है जो रिलीज़ नहीं हुआ है। हो सकता है बेचने वाला रिलीज़ डीड फाइल करना भूल गया हो, या अभी भी बैंक का बकाया हो।
Fix: कुछ भी साइन करने से पहले बैंक की मॉर्गेज रिलीज़ डीड और रिलीज़ के बाद की तारीख वाला नया EC मांगें।
ट्रांजैक्शन लिस्ट में कोर्ट अटैचमेंट
EC में रिकवरी या विवाद कार्यवाही के तहत प्रॉपर्टी अटैच करने का कोर्ट ऑर्डर दर्ज है। अटैचमेंट के दौरान की गई कोई भी सेल रद्द की जा सकती है।
Fix: जब तक बेचने वाला अटैचमेंट हटाने वाला सर्टिफाइड कोर्ट ऑर्डर न दिखाए, डील से पीछे हट जाएं। मौखिक आश्वासन काफी नहीं है।
सर्च पीरियड बहुत कम
बेचने वाला एक साल का EC दिखाता है। कम अवधि पुराने मॉर्गेज और बंटवारों को छुपा देती है।
Fix: शहरी प्लॉट के लिए कम से कम 13 साल और कृषि भूमि के लिए 30 साल की अवधि वाला नया EC मांगें। ज़रूरत पड़े तो लंबी अवधि की फीस खुद भरें।
B1 में देनदारी दिखती है जो EC में नहीं है
Form 16 में शून्य रजिस्टर्ड चार्ज दिखते हैं, लेकिन MP Bhulekh पर मौजूद B1 में राजस्व लियन या विवाद का ज़िक्र है। EC में एक अनरजिस्टर्ड दावा छूट गया।
Fix: पटवारी और तहसीलदार के साथ B1 एंट्री की जांच करें। परस्पर विरोधी रिकॉर्ड पर रजिस्ट्री न करें।
प्रॉपर्टी विवरण में गड़बड़ी
EC में सेल डीड से थोड़ा अलग खसरा या क्षेत्रफल दर्ज है। मामूली फर्क भी आगे चलकर टाइटल ट्रांसफर में रुकावट बन सकता है।
Fix: रजिस्ट्रेशन से पहले सेल डीड से बिल्कुल मेल खाने वाले प्रॉपर्टी विवरण के साथ करेक्शन या नया EC लें।
जाली या अप्रमाणित EC
EC पर कोई QR कोड नहीं है या QR SAMPADA से लिंक नहीं हो रहा। यह दस्तावेज़ नकली हो सकता है।
Fix: दस्तावेज़ संख्या को खुद SAMPADA e-search पर जांचें। अगर एंट्री नहीं मिलती, तो EC असली नहीं है।
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मध्य प्रदेश में ज़मीन खरीदारों के लिए एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट क्यों ज़रूरी है

यही वह इकलौता दस्तावेज़ है जो "देखने में साफ" लगने वाली सेल को कानूनी रूप से साफ बनाता है।

📋
प्रॉपर्टी को रजिस्टर्ड दावों से मुक्त होने की पुष्टि करता है Form 16 EC प्रमाणित करता है कि सर्च विंडो के दौरान कोई रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन नहीं हुआ
Form 15 हर ट्रांजैक्शन सूचीबद्ध करता है, ताकि साइन करने से पहले आप देख सकें कि कौन-कौन से चार्ज मौजूद हैं।
B1 लायबिलिटी से क्रॉस-वेरिफाई करें यह चेतावनी MP में सबसे कम आंकी जाने वाली जांच है
SAMPADA EC सब-रजिस्ट्रार की एंट्री पकड़ता है। B1 राजस्व-संबंधी देनदारियां पकड़ता है। दोनों में से किसी एक को छोड़ने पर पैसे चुकाने के बाद कोई छुपा हुआ चार्ज सामने आ सकता है।
🏦
बैंकों को होम लोन के लिए इसकी ज़रूरत होती है
MP में हर सरकारी और निजी बैंक होम लोन या प्रॉपर्टी पर लोन मंजूर करने से पहले हाल का EC मांगता है, आमतौर पर शहरी प्रॉपर्टी के लिए 13 साल और कृषि भूमि के लिए 30 साल का।
🔍
मध्य प्रदेश-विशेष: SAMPADA का डिजिटल ट्रेल SAMPADA हर रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन को वेरिफाई करने योग्य QR के साथ संभालकर रखता है
पोर्टल से ताज़ा निकाला गया साफ, डिजिटल हस्ताक्षरित EC कोर्ट में, बैंकों में और सब-रजिस्ट्रार के यहां बिना किसी अतिरिक्त सत्यापन के मान्य होता है।
Red flag: अगर बेचने वाला तीन महीने से पुराना EC दिखाता है, नया सर्च करवाने से मना करता है, या SAMPADA पर QR कोड वेरिफाई करने के लिए कहने पर टालमटोल करता है, तो डील खत्म कर दें। MP में ईमानदार बेचने वाले लाइव EC निकलवाने में कोई आपत्ति नहीं करते।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट के लिए ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
[sampada.mpigr.gov.in](http://sampada.mpigr.gov.in) खोलें, लॉगिन करें, Search EC सर्विस ढूंढें, ज़िला, सब-रजिस्ट्रार ऑफिस, प्रॉपर्टी टाइप और सर्च पीरियड डालें, आवेदन शुल्क भरें, और डिजिटल हस्ताक्षरित EC डाउनलोड करें।
MP में EC मिलने में कितना समय लगता है?
SAMPADA के ज़रिए ऑनलाइन सबसे तेज़ तरीका है, जो आमतौर पर पेमेंट कन्फर्म होने के कुछ घंटों में पूरा हो जाता है। सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में ऑफलाइन आवेदन में सर्च पीरियड और ऑफिस के काम के बोझ के हिसाब से सात से चौदह कार्य दिवस लगते हैं।
Form 15 और Form 16 EC में क्या अंतर है?
Form 15 मांगी गई अवधि के दौरान हुए सेल, मॉर्गेज, गिफ्ट और बंटवारे जैसे हर रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन को सूचीबद्ध करता है। Form 16, जिसे Nil EC कहा जाता है, प्रमाणित करता है कि कोई रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन नहीं हुआ। दोनों SAMPADA के ज़रिए सब-रजिस्ट्रार जारी करते हैं।
MP में ज़मीन खरीदने से पहले EC कितने साल का होना चाहिए?
शहरी प्रॉपर्टी के लिए कम से कम 13 साल का EC मांगें, क्योंकि ज़्यादातर दावों की लिमिटेशन अवधि उतनी ही लंबी होती है। कृषि भूमि के लिए पूरे 30 साल मांगें, ताकि बैंक और वकील जिस स्टैंडर्ड टाइटल चेन की जांच करते हैं उससे मेल खाए।
क्या मध्य प्रदेश में होम लोन के लिए EC अनिवार्य है?
हां। MP में हर राष्ट्रीयकृत और निजी बैंक कोई भी होम लोन मंजूर करने से पहले सेल डीड और भू-अभिलेख के साथ हाल का EC मांगता है, आमतौर पर शहरी के लिए 13 साल और कृषि प्रॉपर्टी के लिए 30 साल का।
MP में EC की प्रामाणिकता कैसे जांचें?
डाउनलोड किए गए SAMPADA EC पर छपे QR कोड को स्कैन करें। यह IGRS MP वेरिफिकेशन पोर्टल से जुड़ना चाहिए और वहां वही दस्तावेज़ संख्या और जानकारी दिखनी चाहिए। QR न होना या लिंक टूटा होना का मतलब है कि दस्तावेज़ असली नहीं है।
मध्य प्रदेश में एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट की वैधता अवधि क्या है?
EC जिस सर्च पीरियड को कवर करता है, उसके लिए वैध है। बैंक और सब-रजिस्ट्रार आमतौर पर पिछले तीन से छह महीने में जारी EC स्वीकार करते हैं। नवीनतम फाइलिंग शामिल करने के लिए रजिस्ट्रेशन से ठीक पहले नया EC निकलवाएं।
मध्य प्रदेश में EC और B1 में क्या अंतर है?
EC सब-रजिस्ट्रार का रिकॉर्ड है जो हर रजिस्टर्ड ट्रांजैक्शन सूचीबद्ध करता है। B1 राजस्व लेजर है जो भूमिस्वामी की होल्डिंग, बकाया और टिप्पणियां दिखाता है। EC मॉर्गेज और सेल पकड़ता है। B1 राजस्व देनदारियां पकड़ता है।

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